लालची गांव वाले और दो ठग
नरेशन : हरी पूर गांव क गलय मलालच क हवा बहती थी। यहांहर सरा इंसान
कसी न कसी तरह जद अमीर बनेका सपना देखता था। गांव का सरपंच,
भोलाराम, इस मामलेमसबसेआगेथा।
ँहरी : मनेतो कह दया जो भी योजना आए पैसेबढ़ानेक मसबसेपहलेमैही गा
पैसे
गुलू: सही कह रहा हैतू। अब मेहनत सेपैसा कौन कमाए। सीधा दोगुना पैसा मले,तो सोना है।
कलू: और कोई भी योजना लाए, पहलेसरपंच जी सेपूछ लेना। वो जो कहगेवही
करगे।
नरेशन : ठक उसी व गांव मएक युवक वेश करता हैसाफ-सुथरेकपड़े ,कताब से
भरा थैला लए। उसका नाम था राल
राल (मुकराकर) : अरेकैसेहो हरी काका
हरी (चकतेए) : अरेराल बेटा तू? येया बात हैतूतो शहर मपढ़ाई कर रहा था।
फर यहाँकैसेआया
राल : हां ंव ेंकाका। छुयमगाघूमनआया बत दन हो गए थेजबसेअपनेगाव
को देखा नही था इसलयेघूमनेआ गया
गुलू: बत अा कया बेटा अब तो पढ़-लख गया होगा।
राल : कुछ हद तक। लेकन आप लोग कैसेह? गांव मसब ठक?
कलू: हां, सब बढ़या हैबस बेटा हम लोग इंतजार कर रहेहैकसी बडेमौकेका
जसेहमारेपैसेदो गुना हो जाये
राल (चकतेए) : अरेया कर रहेहो काका ऐसा थोडी होता हैनरेशन : तभी सरपंच भोलाराम तेज़ी सेआता है, साथ मदो आदमी भी उसकेसाथ थे
हाथ मफाइलदेखनेमेसरकारी अधकारी लग रहेथे
सपच भोलाराम : अरेयान दजए गांव वाल येदोन महानुभाव सरकारी अधकारी
ह। शहर क बड़ी कंपनी सेआए ह। इनका नाम मा हैइनका नाम शमाहैअब सुनए
इनक योजना।
मा : हमारी कंपनी एक नई योजना लायी है। यद आप ₹100 जमा करगे, तो हम
अगलेसात दन मआपको ₹200 दगे।
शमा. : येकोई मजाक नह है। और नाही इसमेकोई खतरा हैआपके पैसेपूरी तरह
सुरत रहगे।
ंराल : लेकन मनेइस नाम क कसी कपनी के बारेमशहर मकभी नह सुना।
मा (थोड़ा हकलातेए) : वो दरअसल, कंपनी अभी नई है। इसलए शायद तुहन
पता हो।
राल : अगर आप लोग को दोगुना पैसा देना है, तो उसका फायदा आपको या
मलेगा?
शमा
: हमारा कमीशन कंपनी देती हैआप चता न कर।
नरेशन : मा और शमाएक-सरेमन ही मन बातेकरनेलगतेहैमा : येलड़का यादा सवाल कर रहा हैठक नह।
शमा
: तुम चता मत करो मेरेपास उसके हर सवाल केजवाब है
सपच भोलाराम (गुसेम) : अबेओ राल तूशहर सेपढ़कर आया हैतो हमही
पढ़ाएगा? इनसेयादा तुझेया आता है? जा तूअपनेघर जा यहाँहम लोगो सेबेहस
मत कर
राल : मसफ पूछ रहा था। मैनेशहर मऐसेनकली अधकारी देखेहैजो लोगो को
लूट लेतेहै
सपच : चुप गांव वालेसमझदार हऔर लालच नह, भरोसेक बात कर रहेह।
हरी : हांहां, हमलगता हैबढ़या योजना है।
गुलू: हम सब कल सुबह पैसेजमा करगे
मा : बत बढ़या तो हम सुबह सेयहांचौपाल के पेड़ के नीचेबैठगे। वह पैसेजमा
करगे।
सपच : सभी सुन लो कल सुबह 9 बजेजो जतना पैसा देगा, सात दन बाद दोगुना
मलेगानरेशन : गांव वालेखुशी सेतालयांबजातेह। मा और शमामुकरातेए सरपंच के
साथ उसकेघर चलेजातेह।
समय बता हैऔर रात हो जाती हैमा और शमासरपंच केघर सेनकलकर एक
तालाब के पास पचतेवही बातकरनेलगतेहै
मा : यार शमा, तूनेदेखा ना, कतनी आसानी सेफंस गए सब
शमा
: गांव वालेसीधेहलालची भी बत हैअब तो झोली भर के नोट मलगे
मा : कही दन सेहम योजना बना रहेथेइस गाव मेआनेक और देख आज हमारी
योजना काम भी कर रही है
शमा
: इस गाव केचतो चारो तरफ फैलेए हैक यहाँकतनेलालची लोग रहतेहै
मा : और हमेउसेफायदा हो गया इहेया पता क हम सरकारी अधकारी नही ठग
हैठग
शमा
: जो भी कहो गावालेहैबडेलालजी हमारी बात पर कतनी जद वास कर
लया
नरेशन : उनक येसब बातेराल सुन रहा था जो क पेड के पीछेछुपा आ था
राल (अपनेआपसे) : मुझेकुछ लगाई था ऐसा कया सरकारी अधकारी नही है
लेकन मैनेयेनही सोचा था क येठग नकलगेमुझेइन के बारेमगाव वालो को बताना
ही होगानरेशन : राल जद सेगाव मपंचता हैऔर गाव वालो को सब कुछ बताता हैलेकन
कोई भी गांव वाला उसक बात पर वास नह करते
राल (गांव वाल से) : आप मेरी बात का यकन कजए मअपनेकान सेसुना है
और आंख सेदेखा हैक वह दोन सरकारी अधकारी नह हैवह ठग हैऔर आप
लोग को ठगनेआए ह
हर : बेटा मुझेपता हैक तुम शहर सेपढ़ लख कर आया हैलेकन इसका मतलब यह
नह हैक तूकसी सरकारी अधकारी को ठग कहेगा
गुलू: मुझेलगता हैक तुझेहम गांव वाल सेजलन हो रही है
राल : मुझेआप लोग सेकैसी जलन होगी
यामू: पैस क जलन तुझेयह लग रहा होगा क यह गांव वालेपैसेवालेबन जाएं गेयही
लग रहा हैना तुझे
ंराल : आप लोग मेरी बात का यकन नह कर रहेलेकन मसच कह रहा मेरी बात
पर वास कजए
नरेशन : तभी वहांपर सरपंच भोलाराम आ जाता है
सरपंच भोलाराम : अरेया बात हैयहांकस बात पर बहस चल रही हैहर : यह राल उन सरकारी अधकारय को ठग बता रहा हैऔर कह रहा हैक वह
हमठगनेआए ह
सरपंचभोलाराम : अरेओ राल तेरेसेदन मभी कहा था क हमारेमामलेममत बोल
लेकन लगता हैतो जैसेसमझ नह आएगा मतुझेआखरी बार बता रहा ंअगर तूने
इसेआगेकुछ और भी बोला तो मभूल जाऊं गा क तूमेरेगांव मरहता है
राल : सरपंच जी वह दोन ठग हआप मेरी बात का यकन कजए
सरपंच भोलाराम : देख राल यहांसेचलेजा नह तो मार खाएगा सभी से
नरेशन राल क बात पर कसी नेयकन नह कया वह नराश होकर वापस चला गया
लेकन उसनेहार नह मानी और राल अपनेपुरानेदोत के पास गया
राल( दोतसे) : तुम दोन जद चलो नह तो हमारा गांव कंगाल हो जाएगा
सुनील : या आ भाई? तूऐसा य कह रहा है
नरेशन : राल नेउन दोन को सब कुछबताया
राजू : अब या कर?राल : मगांव वाल को समझनेक कोशश क थी लेकन उहनेमेरी बात नह मानी
शायद तुहारी बात मानलेने
नरेशन राजूऔर सुनील भी राल केसाथ चलनेको तैयार हो जातेहतीन गांव वाल के
पास पंचतेह
राल (जोर से) : गांव वाल सुनए वो दोन लोग ठग हमनेखुद उनकेमुंह सेसुना है
कृपया करकेमेरी बात पर वासकर
हर : फर शु हो गया तू? य हमारी खुशी बा द करना चाहता है?
नरेशन : राल राजूसुनील तीन मलकर गांव वाल को समझनेका यास करतेह
लेकन कोई उनक बात को नहसुनता ऐसेही सुबह हो जातीहैगांव का हर आदमी
े ैली ेकेड़ े ीेंअपनलालच कथलर उस पकनचपंचा, जहा"दोगुना पैसा" देनेका वादा
कया गया था। मा शमाऔर सरपंच तीन वह पर बैठेथे
सपच (मा और शमासे): आज गांव अमीर बनेवाला हैजद-जद नाम लखो
और रसीद दो लोग को।
मा : जी सरपंच जी, बकुल एक-एक का नाम, रकम और साइन सब नोट हो रहा
है।गुलू(₹500 नकालतेए) : मा जी, येलीजए। पूरे₹500 ह। अगलेहते₹1000
मल जाएं गेन?
शमा(मुकराकर) : ज़र मलगेहम लोग मज़ाक नह करते।
हर : येलो मेरे₹1000! बेट क शाद करनी है, सोचा दो हज़ार बन जाएं
।मा : बकुल दोगुना मलेगा। आप चता मत कजए।
कलू(हचकचातेए) : साहब जी मतो मजर आदमी ं। मेरेपास बस ₹300 ह।
सपच : कलू येसोच मत क कम है। आज तू₹300 देगा, कल ₹600 मलेगा।
नरेशन : बारी-बारी सेपूरेगांव वाल नेपैसेजमा करदए राल र खड़ा सब देख रहा था
पास मसुनील और राजूभी खड़ेए थे
राल (गुसेम) : देख रहेहो तुम दोन? कैसेलोग अपनी मेहनत क कमाई ऐसेही दे
रहेह?
सुनील : हां, पर करगेया? कोई हमारी सुन ही नह रहा।
राजू : अब हम कुछ कर भी नह सकतेगांव वाल नेअपने-अपनेपैसेजमा कर दए ह
राल : गांव वाल नेजानबूझकर अपनेपैर पर कुहाड़ी मारी हैनरेशन : रात हो जाती हैमा और शमाएक कमरेमपैस सेभरेबैग को देख रहेथे
और बातकर रहेथे
मा (हंसतेए) : लगभग 1 लाख तो हो ही गए हगे।
शमा : कमाल हैभाई ऐसेमूखगांव वालेदेखेनह कह
मा : हम आज रात ही नकलगे। यादा देर कना ठक नह।
नरेशन : तभी उनकेकमरेमसरपंच आ जाता है
सरपंच : या बातकर रहेहो आप दोन
मा (घबराकर ) : अरेकुछ नह यही बातकर रहेहक अब तो गांव वालेअमीर बन
ं े
जाएगसरपंच : वह तो हैठक हैआप दोन सो जाइए मभी सोनेजा रहा ं
शमा
: ठक हैहम सो जाएं गे
नरेशन : सरपंच वहांसेचला जाता हैमा : चलो अब सब पैस के बैग तैयार करो जसेहम यहांसेनकले
शमा
: हांमबैक तैयार करता ं
नरेशन : पूरेपैसेबाग मभरकर वह दोन गांव छोड़कर चलेजातेहै ंऔर कसी को कुछ
भनक नह पड़ती अगलीसुबह गांव वालेइका होतेहसरपंच भी और डरा आ था
सपच (गांववाल से) :अरे, वो दोन गायब हो गए अब मया कं
हर : मनेपूरे1000 पए दए थे
गांव क औरत : मेरेपास तो जो कुछ था मनेसब देदया था सोचा था क सब गना हो
ं जाएगा लेकन मतो लुट गई अब मकैसेअपना पेट भगी और कैसेअपनेब को पा
लूंगी
सरपंच : मतो खुद उह₹20000 दए थेयह सोचकर क 20000 केमुझे40000
मलगे
याम : राल नेसही कहा था वह दोन ठग ही थेहमनेउसक बात पर वास नह
कया इसमहमारी ही गलती है
नरेशन : तभी वहांपर राल आ जाता हैवहांपर राल आता है
राल ( गांव वाल से) : या आ आप सब उदास य हसरपंच : तूनेसही कहा था उन दोन नेहमेलूट लया वह दोन भाग गए हमारेपैसेलेकर
राल : मनेआप लोग को कतना समझाया था लेकन आप लोग नेमेरी बात नह
मानी
हर : बेटा उन दोन क बात नेपता नह हमारेमन मया जा कर दया था
राल: उन दोन नेकुछ नह कया था यह सब आप लोग क गलती हैया आप लोग
नेएक बार भी यह नह सोचा क बना मेहनत के पैसेकैसेदोगुना हो सकतेह
गुलू: हममाफ कर देहमनेतेरी बात पर यकन नह कया
राल : इस घटना मउन दोन ठगो क कोई गलती नह हैयह सब आप लोग क
गलती हैठगो का तो काम ही होता हैलोग को ठगना आप लोग को खुद ही सोचा थी
क बना मेहनत केकभी पैसेदोगुनी नह होतेलेकन आप लोग नेकुछ नह सोचा
और अपनी मेहनत के पैसेउन ठगो को सप दए
सरपंच : गलती हो गई हमसेबत बड़ी लेकन अब या कर सकतेह
राल : या आप सभी को अपनी गलती का एहसास है
गांव वाले
: हांहमको अपनी गलती का एहसास हराल : आइंदा कभी भी आप कसी भी तरह ऐसी योजना मभाग नह लगेहमेशा
मेहनत करगेऔर मेहनत सेपैसेकमाएं गेऐसी योजना सेनह
गांव वाले
: अब हम कभी भी लालच नह करगेऔर ना ही पैसेदोगुना करनेकेचकर
पड़ग ेजो पैसेकमाएं गेअपनी मेहनत सेही काम आएं गे
राल : तो ठक हैअब मुझेयकन हो गया हैक आप लोग कभी लालच नह करगेम
आप सभी के पैसेआपको वापस दलवा ंगा
गांव वालेएक साथ : लेकन कैसे
राल : मुझेपता था क वह दोन रात को भागेइसलए मनेअपनेपुरानेदोत के
साथ रात भर उनका इंतजार कया और जब वह नकलेतब उन दोन को हम तीन ने
मलकर पकड़ लया
गांववाले
: तो कहांहैवह दोन हम उन दोन को छोड़ग ेनह
राल : सुनील राजूलेआओ उन दोन को
नरेशन : सुनील और राल शमाऔर मा को पकड़ कर लातेहउन दोन को देखकर
गांव वाल मगुसा आ जाता हैसभी गांव वालेउन दोन पैर टूट पड़तेहऔर उनक खूब
पटाई करतेहसरपंच : मा शमाअब मतुम दोन को मपुलस थानेकेडं ेलगवाऊं गा
मा,शमा
: हममाफ कर दो हमसेगलती हो गई हममाफ कर दो
राल : तुम दोन नेगलती नह अपराध कया हैऔर इसक सजा तुहजर मलेगी
और गांव वाल आपके पैसेभी सलामत हराजूसुनील पैस के बैग भीलेआओ
नरेशन : राजूऔर सुनील पैस के बैग लेआतेहऔर गांव वाल को उनके पैसेबांट दए
जातेहगांव वालेअब सीख चुकेथेक लालच करना बत बुरा हैऔर सबसेबड़ा हैपैसे
को दो गुना करनेकेचकर मगलत योजना मपड़ना।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें